मंगलवार 20 जनवरी 2026 - 14:12
उम्मत ए इस्लामी दृढ़ता से आयतुल्लाहिल उज़्मा खामेनई के समर्थन में खड़ी है

हौज़ा / हौज़ा ए इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा अराफ़ी ने कहा है कि आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली खामेनई का पवित्र कुरआन के साथ मात्र एक व्याख्यात्मक सम्बन्ध नहीं, बल्कि एक व्यापक, सभ्यतागत और व्यवस्थित सम्बन्ध है, और दुनिया भर में लाखों लोग रहबर ए मोअज्जम और उनके विचारों के समर्थन में सीमा तक खड़ी हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम अल मुकद्दस में जामियातुल मुस्तफा (स.ल.) के 31वें अंतर्राष्ट्रीय कुरआनिक और हदीस उत्सव के समापन समारोह में बोलते हुए आयतुल्लाह अलीरज़ा अराफ़ी ने कहा कि इस्लामी इतिहास में पवित्र कुरआन की समझ के संदर्भ में अतिवादी और उदासीनता के दृष्टिकोण मौजूद रहे हैं।

जिसके कारण व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में उसका वास्तविक मार्गदर्शन लोगों से छूट गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कुरआन को अहल-ए बैत (अ.स.) से अलग कर देना या केवल हदीस को आधार बनाकर कुरआन की उपेक्षा करना दोनों ही भटकाने वाले विचार हैं।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कुरआन और अहल-ए बैत (अ.स.), यानि सक़लैन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं और यही मुस्लिम उम्मात की मुक्ति और कल्याण का एकमात्र मार्ग है।

आयतुल्लाह अराफ़ी के अनुसार, पैगंबर (स.अ.व.) की सुन्नत का सिलसिला अहल-ए बैत (अ.स.) के चरित्र और शिक्षाओं में स्पष्ट है, जिसे नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं है।

ईरानी हौज़ा-ए इल्मिया के प्रमुख ने कहा कि पवित्र कुरआन हर प्रकार की विकृति से सुरक्षित है और यह इस्लामी विचारधारा की नींव है। उन्होंने अल्लामा तबातबाई (र.ह.) की तफ़सीर अल-मीज़ान को व्याख्या इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए कहा कि आज भी कुरआन में असंख्य ज्ञान छिपे हैं, जिन पर और अधिक इज्तिहादी कार्य की आवश्यकता है।

रहबर-ए मोअज्जम ए इंक़ेलाब के कुरआनी स्थान पर चर्चा करते हुए आयतुल्लाह अराफ़ी ने कहा कि इमाम ख़ामेनेई नवयुवकी से ही कुरआन के साथ गहरा लगाव रखते हैं जो बौद्धिक, व्यावहारिक और क्षेत्रीय सभी स्तरों पर दिखाई देता है। उनकी व्याख्या में शाब्दिक सटीकता, बौद्धिक गहराई, शैक्षिक और मनोवैज्ञानिक, तथा सभ्यतागत पहलू एकसाथ नज़र आते हैं।

उन्होंने कहा कि रहबर-ए इंक़ेलाब की व्यक्तित्व इस मायने में अद्वितीय है कि वे बौद्धिक गहराई के साथ-साथ व्यावहारिक संघर्ष का भी अनुभव रखते हैं।

अंत में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति किसी भी वैश्विक सरकार या समूह के साथ तुलनीय नहीं है। दुनिया भर में लाखों ईमानदार लोग रहबर-ए इंक़िलाब और इस्लामी विचारधारा के समर्थन में अंतिम बूंद खून तक तैयार हैं, और यह संकल्प पूरी इस्लामी उम्मा में गूँज रही है।

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